रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील अंतर्गत ग्राम जामबाहर में अवैध पत्थर खनन अब सीधे-सीधे बारूद के आतंक में बदल चुका है। आरोप है कि विंकल मित्तल बिना किसी वैध अनुमति और बिना रॉयल्टी के लगातार ताबड़तोड़ ब्लास्टिंग कर रहा है, जिससे पूरा इलाका धमाकों से गूंज रहा है। शिकायतकर्ता अशोक चौहान ने जन समस्या निवारण शिविर में विस्तार से बताया कि यह खनन शासकीय वनभूमि पर किया जा रहा है, जहां हर दिन बारूद के धमाके हो रहे हैं। इन विस्फोटों से न सिर्फ जमीन हिल रही है बल्कि शासन को भारी राजस्व हानि भी हो रही है और पर्यावरण को खुला नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
लगातार हो रही जोरदार ब्लास्टिंग का असर अब साफ तौर पर गांव में दिखाई देने लगा है। धमाकों की कंपन से आसपास की कृषि भूमि में दरारें पड़ रही हैं, कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़कर गिर चुके हैं और पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार छाया रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर धमाके के साथ उनके घर तक हिल जाते हैं और डर का माहौल बना रहता है। सबसे ज्यादा चिंता ग्राम पंचायत जामबाहर के खम्हार पकुट जलाशय को लेकर है—ग्रामीणों को आशंका है कि अगर इसी तरह बारूद का इस्तेमाल जारी रहा तो जलाशय की संरचना को नुकसान पहुंच सकता है और किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद न तो ब्लास्टिंग रुकी और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखी, जिससे प्रशासन और माइनिंग विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि विंकल मित्तल पर पहले ही 8 लाख 93 हजार 640 रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है, और उसने लिखित रूप से भविष्य में अवैध खनन न करने का शपथ पत्र भी दिया था, जिसमें खनिज अधिनियम 1957 के तहत सख्त सजा, भारी जुर्माना और प्रतिदिन अतिरिक्त दंड तक स्वीकार किया गया था। इसके बावजूद खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखाते हुए लगातार ब्लास्टिंग और अवैध उत्खनन जारी है। 19 दिसंबर 2025, 23 फरवरी 2026 और 2 अप्रैल 2026 को बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है, और अब ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है—लोग साफ कह रहे हैं कि अगर जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा जनआंदोलन तय है।
