रायपुर : रायपुर साहित्य महोत्सव : ‘पत्रकारिता और साहित्य’ पर पैनल चर्चा आयोजित
रायपुर, 25 जनवरी 2026। रायपुर साहित्य महोत्सव के तीसरे एवं समापन दिवस पर ‘पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित यह सत्र दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय बबन प्रसाद मिश्र की स्मृति को समर्पित रहा। सत्र का संचालन विभाष झा ने किया, जबकि पैनल में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकारों ने भाग लिया।
वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पत्रकारिता और साहित्य—दोनों का मूल आधार जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व है। ‘हरिभूमि’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता में तथ्यों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना आवश्यक है, वहीं साहित्य तथ्यों और परिस्थितियों पर गहन चिंतन के माध्यम से व्यापक दृष्टि प्रदान करता है।
वरिष्ठ पत्रकार स्मिता मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के बीच मुख्य अंतर शैली, भाषा और दृष्टिकोण का है। पत्रकारिता जहाँ तथ्यप्रधान होती है, वहीं साहित्य भावनाओं और संवेदनाओं को केंद्र में रखता है। वहीं पत्रकार और साहित्यकार दोनों रूपों में सक्रिय अवधेश कुमार ने पत्रकारिता और साहित्य को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए कहा कि पत्रकारिता के अनुभव अक्सर साहित्यिक सृजन की प्रेरणा बनते हैं।
सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रख्यात पत्रकारों, जिनमें मुक्तिबोध और माधवराव सप्रे प्रमुख हैं, के योगदान को याद किया गया तथा समकालीन पत्रकारिता में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर स्मृति दुबे के कविता संग्रह ‘करुण प्रकाश’ और लोकनाथ साहू ललकार के कविता संग्रह ‘यह बांसुरी की नहीं बेला है’ का विमोचन भी किया गया।
