ग्राम पंचायत चरखापारा में शुरू हुए मवेशी बाजार को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर पशु तस्करी की आशंकाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि बाजार में बड़ी संख्या में बाहरी व्यापारी पहुंच रहे हैं और मवेशियों की खरीद-फरोख्त बिना किसी प्रभावी निगरानी के हो रही है। जिले में पशु तस्करी रोकने के लिए अभियान चलाए जाने के बावजूद बाजार का संचालन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में आने-जाने वाले मवेशियों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर्याप्त रूप से नहीं हो रही है। आरोप है कि इसी ढिलाई का फायदा उठाकर तस्कर सक्रिय हो रहे हैं और मवेशियों को दूसरे क्षेत्रों की ओर भेजा जा रहा है।
मामले में सबसे अधिक चर्चा चौकी प्रभारी की भूमिका को लेकर हो रही है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब बाजार में गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं तो निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बाजार में होने वाली खरीद-फरोख्त, परिवहन और प्रशासनिक निगरानी की समीक्षा करने की मांग की है, ताकि पशु तस्करी की आशंकाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
आरोप है कि चरखापारा मवेशी बाजार से बड़ी संख्या में मवेशियों का पिकअप वाहनों के माध्यम से परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिकअप वाहन बाजार से मवेशी भरकर अन्य क्षेत्रों की ओर रवाना होते देखे गए हैं, लेकिन उनके दस्तावेजों और परिवहन की वैधता की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते निगरानी और सख्त जांच नहीं की गई तो मवेशी बाजार पशु तस्करी का प्रमुख माध्यम बन सकता है।
