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तबादला आदेश को ठेंगा: बाकारूमा का पटवारी सिस्टम पर भारी—देवदत्त पैंकरा पर किसका हाथ, क्यों मौन है प्रशासन?

धरमजयगढ़ विकासखंड में राजस्व विभाग द्वारा 27 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी कर व्यवस्था सुधार का बड़ा दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे की पोल खोल रही है। जिन कर्मचारियों को वर्षों से जमे रहने के कारण हटाया जाना था, वे आज भी उसी कुर्सी पर जमे हुए हैं। आदेशों की खुलेआम अवहेलना यह साबित कर रही है कि विभागीय निर्देश अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट हो रहा है कि कुछ लोगों के लिए नियमों का कोई मतलब नहीं रह गया है और पूरा सिस्टम उनकी मर्जी से चल रहा है।

इस पूरे मामले में बाकारूमा के पटवारी देवदत्त पैंकरा सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं, जिनका तबादला हल्का नंबर 25 से हल्का नंबर 37 पोटिया किया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करना जरूरी नहीं समझा। इतना ही नहीं, यह भी सामने आया है कि इससे पहले उन पर नक्शे से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद यदि एक कर्मचारी खुलेआम आदेशों की अनदेखी करता है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह पूरे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है—क्या कोई प्रभावशाली हाथ उन्हें बचा रहा है या अधिकारी जानबूझकर चुप्पी साधे बैठे हैं?

अब यह मामला केवल एक कर्मचारी की मनमानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल बन चुका है। यदि पहले से लगे गंभीर आरोपों और वर्तमान में आदेश उल्लंघन के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत होगा कि सिस्टम पूरी तरह से समझौता कर चुका है और नियम-कायदे केवल दिखावे के लिए बचे हैं। ऐसे में आम जनता का भरोसा टूटना तय है, क्योंकि जहां जवाबदेही ही नहीं होगी, वहां न्याय की उम्मीद करना भी बेमानी हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी दबाव और संरक्षण के चलते फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।

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