जशपुर जिले के बहुचर्चित संतोष भगत हत्याकांड में न्यायालय ने आरोपी पत्नी मंगरीता भगत (45) को पति की नृशंस हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन, कुनकुरी ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय और समाज दोनों के हित में स्वीकार्य नहीं है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास व अर्थदंड तथा धारा 238(क) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।
मामला थाना दुलदुला क्षेत्र के ग्राम भिंजपुर का है, जहां 7 नवंबर 2025 की रात घरेलू विवाद के दौरान आरोपी पत्नी ने रसोई में रखे सील-पत्थर से पति संतोष भगत के सिर पर कई प्राणघातक वार कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने खून के धब्बे साफ किए और शव को एक बड़े ट्रॉली सूटकेस में छिपाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। दो दिन बाद जब मृतक की पुत्री और परिजनों ने घर का ताला खोला तो सूटकेस के भीतर शव मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना पर दुलदुला पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की।
प्रकरण की विवेचना निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू ने नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप डिजिटल एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच, जब्ती, मेमोरेंडम और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत आधार तैयार किया। न्यायालय में अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने सभी साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। जशपुर पुलिस ने कहा कि गंभीर अपराधों की निष्पक्ष और वैज्ञानिक विवेचना कर दोषियों को कठोर सजा दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
