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लैलूंगा शिविर में बड़ी लापरवाही: अधिकारी नदारद, जनप्रतिनिधि व मीडिया को सूचना तक नहीं, आखिर क्यों?

लैलूंगा, 02 अप्रैल 2026। आदिवासी अंचल लैलूंगा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर एक बार फिर प्रशासनिक अव्यवस्था का शिकार हो गया। कई जिम्मेदार अधिकारी शिविर से नदारद रहे, वहीं जनप्रतिनिधियों और मीडिया को कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दी गई, जिससे पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर शिविर में पहुंचे थे, लेकिन अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। खासतौर पर शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई, क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी के अनुपस्थित रहने से शिक्षा से जुड़ी कई शिकायतें सुनवाई के बिना ही रह गईं।

गौरतलब है कि यह क्षेत्र जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं जिला शिक्षा समिति के सभापति दीपक सिदार का गृह क्षेत्र है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे शिविरों को केवल औपचारिकता बनने से रोका जा सकेगा।

लैलूंगा जनपद पंचायत में अव्यवस्था और प्रशासनिक सुस्ती अब खुलकर सामने आने लगी है, जहां जनपद सीईओ प्रीति नायडू पर कार्यभार संभालने में नाकामी के आरोप लग रहे हैं। समय पर योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा, शिकायतों का निराकरण लंबित है और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। ऐसे हालातों में सवाल उठता है कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है—क्या सिर्फ जनपद सीईओ प्रीति नायडू या फिर उच्च अधिकारियों की निगरानी में भी कमी है, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित हो रहा है।

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