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सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 19 मार्च 2026

मुख्यमंत्री आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना को उन्होंने प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं महतारी वंदन योजना के तहत 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। इसके साथ ही 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है तथा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने सरहुल नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। मांदर की थाप और उत्साह से भरे माहौल में पूरा परिसर जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया, जहां बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे।

 

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