
अंबिकापुर जिले के मैनपाट ब्लॉक के सुपलगा गांव में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी, जहां परंपरा के उलट दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। विवाह की सभी रस्में दूल्हे के घर पर पूरी हुईं और इसके बाद दूल्हे की विदाई कर उसे दुल्हन के घर ले जाया गया। इस अनूठे विवाह को देखने के लिए गांव के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
दुल्हन के पिता मोहन एक्का की चार बेटियां हैं और बेटे की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने ऐसा दामाद चुना, जो घर जमाई बनकर उनके साथ रह सके। इसी शर्त पर ग्राम सुपलगा निवासी बिलासुस बरवा से बेटी देवमुनी एक्का का रिश्ता तय हुआ। दोनों पक्षों की सहमति से बिना दहेज के यह विवाह संपन्न हुआ और सामाजिक परंपराओं से हटकर नई मिसाल पेश की गई।
शादी में शामिल ग्रामीणों ने इसे समय की जरूरत और सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना है कि परिवार के सहारे के लिए लिया गया यह निर्णय समाज में नई सोच को बढ़ावा देता है। दूल्हा अब अपने ससुराल में रहकर परिवार और खेती-किसानी की जिम्मेदारी संभालेगा, वहीं दोनों परिवार इस फैसले से संतुष्ट और खुश नजर आए।