लैलूंगा की महिलाओं ने स्वरोजगार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
रायगढ़, 2 अप्रैल 2026/ लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम चोरंगा की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बनकर उभरी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर संतोषी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपने हुनर को पहचानते हुए उसे आय के साधन में बदल दिया है। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाली ये महिलाएं आज अपने दम पर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
करीब चार साल पहले छोटे स्तर से शुरू हुआ यह प्रयास अब कई उत्पादों तक पहुंच चुका है। महिलाएं गाय के दूध से घी, खोवा और पनीर तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी मिल रही है। इसके साथ ही वे मिर्ची का अचार बनाकर स्थानीय बाजार में बेच रही हैं और वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रही हैं, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है।
छिंद और सेवई घास से टोकरी बनाकर महिलाएं अपनी पारंपरिक कला को भी सहेज रही हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है। लैलूंगा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उन्होंने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाकर विक्रय भी किया, जिसे लोगों ने सराहा। चोरंगा की ये महिलाएं अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही हैं।
