लैलूंगा जनपद में कमीशनखोरी पर व्यंग्य: जनसमस्या निवारण शिविर बना ‘अधिकारी कल्याण महोत्सव’
लैलूंगा। जनपद पंचायत लैलूंगा में व्यवस्था को लेकर तीखा व्यंग्य सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बिना “कमीशन” के कोई भी काम आगे नहीं बढ़ता। कहा जा रहा है कि यहां फाइलें तभी चलती हैं जब जेब भारी हो, अन्यथा वे “योग मुद्रा” में स्थिर हो जाती हैं। बाबू से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक पर कटाक्ष करते हुए पूरे सिस्टम को “कमीशन-चालीसा” पर चलने वाला बताया गया है, जहां नियम नहीं बल्कि “नजराना” काम की असली शर्त बन गया है।
हाल ही में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर को भी निशाने पर लिया गया है। व्यंग्य में कहा गया है कि शिविर में जनता की समस्याएं हल हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन पंचायतों के फंड का “निवारण” जरूर हो गया। आरोप है कि पंचायतों से शिविर के नाम पर वसूली की गई, मानो किसी बड़े आयोजन के लिए चंदा लिया जा रहा हो, और विकास कार्यों के बजट की “आहुति” दे दी गई।
पूरे मामले में “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी तंज कसते हुए इसे “जीरो काम विदाउट पेमेंट” बताया गया है। व्यंग्य के अंत में प्रशासन से सवाल किया गया है कि क्या भविष्य में ऐसे शिविरों में पंचायतों को “लूट की रसीद” भी दी जाएगी या इसे गुप्त दान मानकर नजरअंदाज किया जाएगा।
