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मेकाहारा रायपुर में चाकू से कटी सबक्लेवियन आर्टरी जोड़कर डॉक्टरों ने बचाया युवक का हाथ, चार घंटे चली जटिल सर्जरी

अम्बेडकर अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 34 वर्षीय युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में कटी मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर उसका हाथ कटने से बचा लिया। गंभीर रूप से घायल मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में ट्रॉमा यूनिट लाया गया था। समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलता तो हाथ काटने की नौबत आ सकती थी और मरीज स्थायी दिव्यांग हो जाता।

डॉक्टरों के अनुसार मरीज अमलेश्वर का निवासी है और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में कार्यरत है। सड़क विवाद के दौरान हुए चाकू के वार से क्लेविकल बोन के पीछे स्थित मुख्य धमनी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और हाथ में रक्त प्रवाह बंद हो गया। परिजन पहले अन्य अस्पतालों में गए, लेकिन केस की जटिलता के कारण उपचार संभव नहीं हो सका। बाद में मेकाहारा के विशेषज्ञ विभाग में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि सबक्लेवियन आर्टरी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। टीम ने ऑर्थोपेडिक सर्जनों की मदद से कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई और लगभग तीन सेंटीमीटर क्षतिग्रस्त हिस्से को कृत्रिम नस डेक्रॉन ग्राफ्ट से जोड़ा। करीब चार घंटे चले ऑपरेशन के दौरान पांच यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा। विशेष सावधानी रखते हुए तंत्रिका तंत्र ब्रैकियल प्लेक्सस को सुरक्षित रखा गया और ऑपरेशन के बाद हड्डी को प्लेट लगाकर पुनः जोड़ दिया गया।

सफल उपचार के बाद मरीज का हाथ पूरी तरह सुरक्षित है और वह सामान्य जीवन में लौट चुका है। इस जटिल सर्जरी में हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में ऑर्थोपेडिक सर्जन प्रणय श्रीवास्तव, लोमेश साहू, एनेस्थेटिस्ट संकल्प दीवान, बालस्वरूप साहू सहित जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधन ने इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि समन्वित प्रयास और उच्च विशेषज्ञता से असंभव उपचार भी संभव हो सकता है।

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