कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने खम्हार-पाकुट जलाशय का किया निरीक्षण, तटीय क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए ब्लूप्रिंट बनाने के निर्देश
रायगढ़, 12 मार्च 2026। लैलूंगा विकासखंड के दौरे पर पहुंचे कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने ग्राम पंचायत जाम बहार स्थित खम्हार-पाकुट जलाशय योजना का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से योजना की वर्तमान स्थिति तथा आगे की कार्ययोजना के बारे में जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए।
शासन द्वारा प्रतिवर्ष मछलियों के प्रजनन काल के दौरान, जब मछलियों के पेट में अंडे रहते हैं, उस समय मछली पकड़ने और मारने पर प्रतिबंध लगाया जाता है ताकि जलाशयों में मत्स्य प्रजातियों का संरक्षण हो सके और उनकी संख्या में वृद्धि बनी रहे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आती रही हैं कि आदिवासी मत्स्य समिति लैलूंगा द्वारा इस प्रतिबंध अवधि में भी मछली पकड़ने का कार्य किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि नियमों के विपरीत इस प्रकार की गतिविधियों से जलाशय में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए इस पर संबंधित विभाग द्वारा निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
इस जलाशय का निरीक्षण से पहले कलेक्टर कार्तिकेय गोयल द्वारा भी किया गया था। उस दौरान भी जलाशय क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर संभावनाएं जताई गई थीं, लेकिन निरीक्षण के बाद भी यहां किसी प्रकार का ठोस विकास कार्य जमीन पर दिखाई नहीं दे सका। समय बीतने के बावजूद तटीय क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और पर्यटन की दृष्टि से प्रस्तावित योजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं, जिसके कारण यह जलाशय अब तक अपनी संभावनाओं के अनुरूप विकसित नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय पर योजना के अनुसार कार्य होता तो यह क्षेत्र आज एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता था, जिससे आसपास के ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिलते। अब एक बार फिर प्रशासन द्वारा निरीक्षण और ब्लूप्रिंट तैयार कराने के निर्देश दिए जाने से क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जलाशय के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
कलेक्टर कार्तिकेय गोयल से पहले इस जलाशय का निरीक्षण से पहले कलेक्टर भीम सिंह द्वारा भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान जलाशय के तटीय क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और पर्यटन की दृष्टि से विकास को लेकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, ताकि यहां आवश्यक निर्माण और सुविधाओं का विकास किया जा सके। हालांकि प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी अब तक इस दिशा में किसी प्रकार का ठोस डेवलपमेंट कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिसके कारण जलाशय क्षेत्र की विकास संभावनाएं अभी भी अधूरी ही बनी हुई हैं।
