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16 वर्षों से बिना मान्य जाति प्रमाण पत्र नौकरी का मामला—सेवा समाप्ति की अनुशंसा के बाद भी सहायक शिक्षिका कर रही ड्यूटी, विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

अमिताभ गुप्ता कोरिया

जिला कोरिया में सहायक शिक्षिका अंजना शैलू के विरुद्ध जाति प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा प्रशासनिक मामला सामने आया है। पी.एम. पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के बाद जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने जांच में पाया कि संबंधित शिक्षिका पिछले लगभग 16 वर्षों से बिना छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा जारी वैध स्थायी जाति प्रमाण पत्र के शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। इस खुलासे के बाद पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है।

24 नवम्बर 2025 को अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में मामले की विस्तृत सुनवाई की गई। कई बार नोटिस जारी होने के बाद शिक्षिका समिति के समक्ष उपस्थित हुईं और मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से जारी प्रमाण पत्र की छायाप्रति प्रस्तुत की। जांच में यह दस्तावेज छत्तीसगढ़ में आरक्षण लाभ हेतु अमान्य पाया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत अस्थायी प्रमाण पत्र की वैधता पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

समिति ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया कि नियुक्ति आदेश की शर्तों के अनुसार एक माह के भीतर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया। इतने वर्षों तक बिना वैध दस्तावेज के सेवा में बने रहना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विभागीय लापरवाही को भी उजागर करता है। इस पर समिति ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

जिला स्तरीय प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने सर्वसम्मति से शिक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार सेवा समाप्ति की कार्यवाही की अनुशंसा करते हुए प्रकरण स्कूल शिक्षा विभाग को भेजने का निर्णय लिया। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 दिवस के भीतर आवश्यक कदम उठाकर अवगत कराने के निर्देश भी जारी किए गए, ताकि अवैध नियुक्ति पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

हैरानी की बात यह है कि इतनी स्पष्ट अनुशंसा और निर्देशों के बावजूद संबंधित सहायक शिक्षिका आज भी विद्यालय में नियमित रूप से ड्यूटी कर रही हैं। आदेश के क्रियान्वयन में हो रही देरी से प्रशासनिक तंत्र की गंभीर उदासीनता सामने आ रही है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं और उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर नियमसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है।

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